4 जुलाई 2025, शुक्रवार का दिन अनेक शुभ संयोगों के साथ आया है। इस दिन रवि योग, शिव योग, और चित्रा नक्षत्र के साथ माँ लक्ष्मी की विशेष कृपा कुछ राशियों पर बरसेगी। इसके साथ ही चतुर्मास व्रत काल का आरंभ हो चुका है, जो आध्यात्मिक साधना, पुण्यकर्म और धर्मार्जन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण समय है।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| दिन | शुक्रवार |
| तिथि | शुक्ल पक्ष नवमी (सायं 04:31 बजे तक), तत्पश्चात दशमी |
| नक्षत्र | चित्रा (सायं 04:50 तक), तत्पश्चात स्वाती |
| योग | शिव (सायं 07:36 तक), तत्पश्चात सिद्ध |
| सूर्योदय | 06:02 AM |
| सूर्यास्त | 07:23 PM |
| राहुकाल | 11:03 AM से 12:43 PM |
| दिशाशूल | पश्चिम दिशा |
| व्रत विशेष | नवमी को लौकी का सेवन वर्जित (ब्रह्मवैवर्त पुराण) |
| ऋतु | वर्षा ऋतु |
| मास | आषाढ़ |
| अयन | दक्षिणायन |
मिथुन, कन्या, मेष, तुला, धनु और कुंभ
धनलाभ, रुके हुए कार्यों में सफलता
करियर में नए अवसर, माँ लक्ष्मी की विशेष कृपा
करियर में नई दिशा और सम्मान
शिव योग का पूर्ण लाभ, कार्यस्थल पर उन्नति
व्यवसाय में लाभदायक डील
परिवार का सहयोग और आत्मविश्वास में वृद्धि
व्यावसायिक संतुलन और लाभ की संभावना
खर्च और आमदनी में नियंत्रण से आर्थिक स्थिति मजबूत
शिक्षा और रिसर्च से जुड़े लोगों को सम्मान और धन
लक्ष्मी योग से मान-सम्मान प्राप्त होगा
रुके हुए कार्यों में प्रगति
पारिवारिक सहयोग से निर्णयों में सफलता
| राशि | कार्य/सुझाव |
|---|---|
| मेष | नई शुरुआत करें, आत्मविश्वास से निर्णय लें |
| वृषभ | जिम्मेदारियों के साथ धन की स्थिति मजबूत होगी |
| मिथुन | पुराना रुका धन वापस मिल सकता है |
| कर्क | भावनाओं में बहने से बचें, निवेश सोच समझकर करें |
| सिंह | नौकरी में परिवर्तन संभव, स्वास्थ्य का ध्यान रखें |
| कन्या | प्रमोशन की संभावना, माँ लक्ष्मी की कृपा |
| तुला | खर्चों पर नियंत्रण, मित्रों से सहयोग |
| वृश्चिक | किसी पुराने मामले का समाधान निकलेगा |
| धनु | मान-सम्मान में वृद्धि, करियर में स्थिरता |
| मकर | लोन या निवेश मामलों में सतर्क रहें |
| कुंभ | नई योजना बनेगी, परिवार से समर्थन |
| मीन | व्यय अधिक रहेगा, मानसिक शांति हेतु पूजा करें |
4 जुलाई 2025 का दिन धर्म और धन दोनों दृष्टियों से अत्यंत फलदायी है। माँ लक्ष्मी, शिव योग, और चतुर्मास व्रत — इन तीनों का संगम जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, समृद्धि और अध्यात्म का अद्वितीय संयोग लाता है। यदि आप आज के दिन को संयम, सेवा और श्रद्धा से जिएंगे, तो निश्चित ही आपको पुण्य, लाभ और मानसिक शांति का अनुभव होगा।
चतुर्मास आषाढ़ शुक्ल एकादशी (देवशयनी एकादशी) से शुरू होता है और कार्तिक शुक्ल एकादशी (देवउठनी एकादशी) तक चलता है। यह चार माह का विशेष धार्मिक काल होता है।
इस दौरान मांस, मद्य, प्याज, लहसुन, मैथुन, असत्य भाषण, गर्म जल से स्नान और जीवों को कष्ट देना वर्जित माना गया है। यह संयम और साधना का समय होता है।
जी हां, चतुर्मास में किया गया स्नान, दान, जप, होम और व्रत सामान्य दिनों की अपेक्षा कई गुना फलदायी होता है। गौ, अन्न, जल, वस्त्र आदि का दान अत्यंत शुभ माना गया है।
इस दिन रवि योग और शिव योग बन रहे हैं, जो विशेष रूप से कार्य सिद्धि, आर्थिक उन्नति और करियर में सफलता के लिए शुभ माने जाते हैं।
मिथुन, कन्या, मेष, तुला, धनु और कुंभ राशियों को आज माँ लक्ष्मी की विशेष कृपा और शिव योग का फल प्राप्त हो सकता है।
ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, नवमी तिथि को लौकी का सेवन वर्जित है क्योंकि यह तामसिक प्रभाव देता है और व्रत-धर्म में बाधक होता है।
‘ॐ नमः शिवाय’ और ‘ॐ विष्णवे नमः’ का जप इस काल में अत्यंत पुण्यदायक होता है, विशेषकर जल में स्नान के समय बिल्वपत्र अथवा आँवला डालकर जप करने से शुभ फल प्राप्त होता है।
नहीं, चतुर्मास के दौरान ग्रहण काल में स्नान वर्जित माना गया है। केवल ग्रहण समाप्ति के बाद शुद्ध स्नान करना चाहिए।
पद्म पुराण और अन्य शास्त्रों के अनुसार, चतुर्मास में रात्रि और संध्या समय स्नान नहीं करना चाहिए। इससे पुण्य के स्थान पर दोष उत्पन्न हो सकता है।
संयम, व्रत, दान और सेवा के साथ चतुर्मास व्यतीत करने से व्यक्ति को मोक्ष, स्वास्थ्य, मानसिक शांति और पूर्वजों की कृपा प्राप्त होती है। यह आत्मिक उन्नति का श्रेष्ठ काल है।