यहाँ पढ़ें अंजनी माता चालीसा का संपूर्ण पाठ अर्थ सहित। जानें अंजनी माता की कथा, मंदिर, चालीसा पाठ के लाभ और अक्सर पूछे जाने वाले सवाल।
।। दोहा ।।
चैत्र सुदी वैसाख सुदी, जेष्ठ सुदी को जान।
आसाढ़ श्रावण सुदी, चौदस को पहचान।।
भादुड़ा आसौज की, और कार्तिक की सुदी।
सुदी मार्गशीर्ष और पौष की देती सबको बुद्धि ।।
फाल्गुन सुदी चतुर्दशी पूजे सब नरनार।
अंजनी माता आपका कारज देसी सार।।
।। चौपाई ।।
रिमझिम रिमझिम मेहा बर्षे।मानो चन्दन फुहार दर्से ।।
इन्दर गाजे पवन पुरवायी।सांची माता अंजनी आयी।।
देख मात को हनुमत हर्षे ।चरण कमल में मस्तक स्पर्से ।।
चौकी चाँदी की सरकाई।जिस पर बैठी अंजनी माई।
हाथ पसार गोंद बैठाया।पुत्र प्रेम पय पान कराया।।
मस्तक पर मेला निज हाथ ।भला करे राम रघुनाथ ।।
सिंहासन पर सालग्राम हैं।कृष्ण चन्द्र लक्ष्मी जी बाम हैं।।
दर्शन करने इसका आई।आसन चौकी चाँदी पाई।।
माता कहे सुनो हनुमाना।जो मन भावे माँगो वरदाना ।।
बोले हनुमान सुनो मेरी माई।देवो वरदान सदा सुखदाई।।
सालासर नगरी के अन्दर।बने मात का सुन्दर मन्दिर ।।
वचन दिया माता ने अपना।बारह वर्ष का साँचा सपना।।
सुहाग भाग आनन्द की दाता।सुमरो श्रीहनुमंत की माता।।
साँझ सवेरे ध्यान लगाओ।मन इच्छा माँगो सो पाओ।।
हरो मात सब संकट दूषण।आन चढ़ाऊँ सुवरण भूषण ।।
चीर बढ़ा अंजनी माता का।है प्रताप अन धन दाता का।।
लगे दुहाई माता के चीर की।रक्षा करे बालक के शरीर की।।
अंजनी माता रक्षा करेगी।आप ताप संकट को हरेगी।।
जय जय अंजनी मात भवानी ।जय कपि केशरी की पटरानी।।
जय जय गौतम ऋषि कुमारी |जय जय मात जाऊँ बलिहारी।।
देखो माता पुत्र खिलावे।अंगुली से घी चीनी चटावे ।।
केशरी राजा गिरा उचारे।आओ मेरे प्राण पियारे।।
मीठी मीठी धरी मिठाई।खड़ी पुकारे अंजना माई।।
करो कलेवा मेरे लाला।पीवो अमृत बजरंग बाला ।।
पाटी लेकर पढ़बा जावो।सूर्य देव से विद्या पाओ।।
अवधपति ने यज्ञ किया था।अग्नि देव ने खीर दिया था।।
कौशल्या के जन्मे राम।भरत कैकेयी के सुख धाम।।
लक्ष्मण और शत्रुध्न वीरा।नित खेलें सरयू के तीरा।।
हनुमान की अंजनी माई।कौशल्या माता मन भाई।।
कौशल्या के हनुमत प्यारा।होय राम से कभी न न्यारा ।।
शंकर-सुत और पवन कुमारा।बजरंगी है नाम तुम्हारा ।।
करि मात की कोख उजागर।बल बुद्धि विद्या गुणसागर।।
ब्रह्म वंश जो सेवा करते।ज्ञान भक्ति से हृदय भरते।।
मात अंजनी नाम अमर है।क्षत्रिय ध्यावे जीत समर है।।
जपे सेठ अरु साहूकारा।अन्न धन से सब भरे भंडारा ।।
चारों वर्ण माता को ध्यावें।मात कृपा से वे सुख पावें।।
अंजनी माता का चालीसा।मनसा पूरण विश्वा बीसा ।।
।। दोहा ।।
राजस्थान की भूमि में सालासर है ग्राम। जहाँ प्रगटी मातेश्वरी, जग में जाहिर नाम।।
॥ इति अंजनी माता चालीसा संपूर्णम् ॥
अंजनी माता को पौराणिक कथाओं में हनुमान जी की माता और वानरराज केसरी की पत्नी माना जाता है। कहा जाता है कि अंजनी माता पूर्व जन्म में देवलोक की अप्सरा पुंजिकस्थला थीं। ऋषि दुर्वासा के श्राप के कारण उन्हें धरती पर वानरी के रूप में जन्म लेना पड़ा।
अंजनी माता को शिव जी के अंश के रूप में हनुमान जी को जन्म देने के लिए अवतरित माना जाता है। उनके जन्म से उनका श्राप समाप्त हो गया था और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई।
अंजनी माता ने अपने पति केसरी के साथ मिलकर शिव जी की कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने वायु देव के माध्यम से उन्हें वरदान स्वरूप हनुमान जी जैसे पराक्रमी पुत्र का आशीर्वाद दिया।
अंजनी माता को हिमाचल प्रदेश के मसरेर गाँव में कुलदेवी के रूप में पूजा जाता है। यहाँ उनका एक प्राचीन मंदिर है, जहाँ लोग अपनी मनोकामनाओं के लिए दर्शन करते हैं।
पौराणिक कथा के अनुसार ऋषि दुर्वासा ने अंजनी माता को श्राप दिया था। कहा जाता है कि अंजनी माता ने तपस्या में लीन ऋषि की साधना में विघ्न डाला था, जिससे क्रोधित होकर ऋषि ने उन्हें वानरी बनने का श्राप दे दिया।
भारत में अंजनी माता के कई मंदिर हैं। प्रमुख मंदिर करौली (राजस्थान), सालासर (राजस्थान) और हरिद्वार (उत्तराखंड) में स्थित हैं। इन मंदिरों में विशेष रूप से नवरात्रि और हनुमान जयंती के मौके पर विशेष पूजा होती है।
नहीं, अंजनी माता चालीसा और हनुमान चालीसा अलग-अलग हैं। हनुमान चालीसा हनुमान जी की स्तुति है जबकि अंजनी माता चालीसा में माता अंजनी के रूप, तपस्या और महिमा का गुणगान किया जाता है।
अंजनी माता चालीसा का पाठ करने से संतान सुख की प्राप्ति, जीवन में शांति और बाधाओं से मुक्ति मिलती है। यह चालीसा खासकर उन लोगों के लिए लाभकारी मानी जाती है जो संतान सुख की कामना रखते हैं।
अंजनी माता की कथा त्याग, तपस्या और मातृत्व की अद्भुत मिसाल है। उन्होंने भगवान शिव की तपस्या कर हनुमान जी जैसे अद्वितीय पुत्र को जन्म दिया और उनका जीवन लोक कल्याण के लिए समर्पित रहा।
अंजनी माता को लोग शक्ति स्वरूपा और मातृत्व की प्रतीक के रूप में पूजते हैं। विशेषकर संतान सुख की कामना करने वाले भक्त उनकी पूजा करते हैं।