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गोवर्धन पूजा एवँ महत्व: गोवेर्धन पर एक छोटा विचार गो+वर्धन = गोवर्धन हम अपने जीवन से, गौ को नहीं हटा सकते। हमारी ऐसी परंपराएं है जो ऐसा होने..
गोवेर्धन पर एक छोटा विचार "गो+वर्धन = गोवर्धन" हम अपने जीवन से, गौ को नहीं हटा सकते। हमारी ऐसी परंपराएं है जो ऐसा होने नहीं देंगी, गौ पृथ्वी स्वरूपा माँ है, यह प्राणी नहीं प्राण है और जानवर नही जान है इस देश की।
जीवन से मृत्यु तक के सारे के सारे 16 संस्कार बिना गौ के नहीं हो सकते। दीपावली के पांच दिन के त्योंहारों के क्रम में आज गोमय यानि गोबर की पूजा की जाती है क्योंकि इसका मल, मल नही मलशोधक है, पूरे विश्व में केवल गोमाता के मल यानि गोबर की पूजा होती है, गो-वर, यह गौ का वरदान है, हवन स्थान को पवित्र करने के लिए गोबर का लेपन लगाया जाता है, सभी प्रकार के दोषों, यहाँ तक कि आणविक प्रभाव को भी निष्फल करने की ताकत है इस गोबर में, इसलिए हमारे शास्त्र कहते है "गोमय वसते लक्ष्मी" भगवान का जन्म ही गौ की रक्षा के लिए हुआ रामायण की चौपाई बोल रही हैविप्र धेनु सुर संत हित, लीज मनुज अवतार ।।
सात्विकता और संस्कार की जननी है गौ। वेद कहते हैं- गावः विश्वस्य मातरः इसलिए आज का पर्व कह रहा है यथा संभव गौ का रक्षण-संवर्धन करें! क्योकि यह मानव मात्र के लिए उपयोगी है। विज्ञान भी कहता है कैंसर अवरोधी करक्यूमिन नाम का chemical भी गोमूत्र मै प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है । वह भी digestive form में, यह भी गोवेर्धन से ही संभव है।
मिट्टी में उपलब्ध सभी 18 micronutrient गो मूत्र में उपलब्ध है। वेद में इसे महौषधि की संज्ञा दी गई है। इसके लिए भी गोवेर्धन आवश्यक है। सामान्य जल को गंगाजल के समान पवित्र गोमूत्र में परवर्तित करने की क्षमता तो केवल गोमाता में है, इसीलिये तो भगवान कृष्ण भी, गो के आगे नही, पीछे चले वह भी नंगे पैर, हमारे सभी इष्ट देवों ने भी कोई अन्य स्थान न चुनकर, गौ के शरीर में ही अपना वास किया। शास्त्र के अनुसार 33 कोटि देवताओं का वास गोमाता में ही है। गो महिमा अनंत है.......
दाह संस्कार के बाद 70-75 किलो का शरीर 20-25 ग्राम राख में परिवर्तित हो जाता है और उस राख का वैज्ञानिक विश्लेषण पर पाया गया कि इसमें सभी 18 micronutrient वही तत्व मौजूद है जो गोमूत्र में है अर्थात शरीर जिन तत्वों से मिलकर बना है वह सभी गो मूत्र में मौजूद है। यह तभी मिल सकता है जब गौ संरक्षित हो, आज के पर्व की महत्ता, गो के रक्षण संवर्धन से है अर्थात गोवेर्धन से है ।
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