जानिए 5 जुलाई 2025 का राशिफल, वैदिक पंचांग, सिद्ध योग, एकादशी व्रत का महत्व और चतुर्मास की शुरुआत का विशेष लाभ। वृषभ, कर्क, कन्या, धनु और मकर राशि के लिए शुभ संकेत।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| दिन | शनिवार |
| तिथि | शुक्ल पक्ष दशमी (शाम 06:58 बजे तक), तत्पश्चात एकादशी |
| नक्षत्र | स्वाती (शाम 07:51 तक), तत्पश्चात विशाखा |
| योग | सिद्ध (रात्रि 08:36 तक), तत्पश्चात साध्य |
| सूर्योदय | 06:03 AM |
| सूर्यास्त | 07:23 PM |
| राहुकाल | 09:23 AM से 11:03 AM |
| दिशाशूल | पूर्व दिशा |
| व्रत विशेष | भडली नवमी | पीपल स्पर्श का पुण्य फल (ब्रह्म पुराण) |
| ऋतु | वर्षा ऋतु |
| मास | आषाढ़ |
| अयन | दक्षिणायन |
वृषभ, कर्क, कन्या, धनु और मकर
सिद्ध योग में निवेश या प्रॉपर्टी से लाभ
कार्यस्थल पर सफलता के संकेत
किस्मत का पूरा साथ
किसी पुराने काम में लाभ मिल सकता है
धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी
साक्षात्कार या परीक्षा में सफलता मिलने के योग
संपत्ति से लाभ
करियर में स्थिरता और सम्मान प्राप्त होगा
पराक्रम और पुरुषार्थ से नाम और लाभ
महत्वपूर्ण निर्णयों में घर का सहयोग मिलेगा
एकादशी व्रत: 5 जुलाई को शाम 06:58 से प्रारंभ, 6 जुलाई को रात्रि 09:14 तक रहेगा। उपवास 6 जुलाई, रविवार को रखें।
विद्यार्थियों और साधकों के लिए यह समय विशेष फलदायी है:
| राशि | कार्य/सुझाव |
|---|---|
| मेष | पीपल का स्पर्श करें, कार्य सिद्धि में लाभ |
| वृषभ | धन और व्यापार में शुभ संकेत |
| मिथुन | परिवार से संबंध बेहतर होंगे |
| कर्क | अचानक लाभ का योग |
| सिंह | यात्रा टालें, स्वास्थ्य पर ध्यान दें |
| कन्या | विद्यार्थियों को सफलता के संकेत |
| तुला | ध्यान और मौन से मानसिक शांति |
| वृश्चिक | महत्वपूर्ण योजना बनेगी |
| धनु | पुराने कामों में सम्मान प्राप्त |
| मकर | कार्यस्थल पर प्रशंसा और सहयोग |
| कुंभ | संत दर्शन से लाभ मिलेगा |
| मीन | जप और दान पर ध्यान दें |
05 जुलाई 2025 का दिन चतुर्मास की शुरुआत, एकादशी व्रत, और सिद्ध योग का दुर्लभ संगम लेकर आया है। वृषभ, कर्क, कन्या, धनु और मकर राशि वालों के लिए यह दिन अत्यंत शुभफलदायक है। संयम, जप, ध्यान, और दान से जीवन में स्थिरता, समृद्धि और अध्यात्म का समावेश संभव है।
2025 में चतुर्मास 6 जुलाई (रविवार) से प्रारंभ होगा, जो देवउठनी एकादशी तक चलेगा।
इस बार एकादशी व्रत 6 जुलाई को रखें। तिथि 5 जुलाई शाम 6:58 से शुरू होकर 6 जुलाई रात 9:14 तक है।
ब्रह्म पुराण के अनुसार, शनिवार को पीपल का स्पर्श करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं और ग्रह पीड़ा शांत होती है।
वृषभ, कर्क, कन्या, धनु और मकर राशियों को सिद्ध योग और एकादशी व्रत से लाभ होगा।
ब्रह्मचर्य, मौन, सत्संग, जप, ध्यान, संत सेवा, और ताँबे के पात्र का त्याग — ये सब चतुर्मास में श्रेष्ठ माने जाते हैं।
सारस्वत्य मंत्र का जप, मौन साधना, श्वास गिनना, ध्यान आदि से विद्यार्थियों को अद्भुत सफलता मिलती है।