×
Home Jyotish Consultation Rate Us On Google Play Share Our App
Jai Bhole

भूलकर भी श्राद्ध पक्ष में मत करना ये 5 काम, वरना लुट जाएगा सारा सुख-चैन

पितृ पक्ष 2026 में भूलकर भी न करें ये 5 काम। जानिए श्राद्ध पक्ष में क्या नहीं करना चाहिए, कौन से काम वर्जित हैं और पितरों की कृपा के लिए किन बातों का ध्यान रखें।

shraddha paksha me kya na kare
Total Mala Count (माला गिनती) : 0

Pitru Paksha 2026: हिंदू धर्म में पितृ पक्ष या श्राद्ध पक्ष को पूर्वजों के स्मरण, तर्पण और श्राद्ध कर्म के लिए विशेष समय माना जाता है। इस दौरान परिवार अपने दिवंगत पूर्वजों को श्रद्धापूर्वक याद करता है और उनकी आत्मिक शांति के लिए परंपरागत विधि-विधान से कर्म करता है।

साल 2026 में पितृ पक्ष की मुख्य अवधि 27 सितंबर से 10 अक्टूबर तक मानी जा रही है। वहीं 26 सितंबर को भाद्रपद पूर्णिमा की श्राद्ध तिथि है। इसके बाद 27 सितंबर से प्रतिपदा श्राद्ध के साथ मुख्य पितृ पक्ष शुरू होता है और 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ इसका समापन होता है।

पितृ पक्ष को लेकर अलग-अलग परिवारों और परंपराओं में कुछ नियमों में अंतर हो सकता है। इसलिए किसी भी श्राद्ध कर्म के लिए स्थानीय पंचांग और अपनी पारिवारिक परंपरा को प्राथमिकता देना उचित माना जाता है।

लेकिन कुछ ऐसे श्राद्ध पक्ष के नियम हैं जिन्हें धार्मिक परंपराओं में विशेष महत्व दिया जाता है। मान्यता है कि इस दौरान व्यक्ति को अपने व्यवहार, खान-पान और दैनिक जीवन में संयम रखना चाहिए।

आइए जानते हैं वे 5 काम जिन्हें पितृ पक्ष में भूलकर भी नहीं करना चाहिए।

1. श्राद्ध पक्ष में मांगलिक कार्य करने से बचें

पितृ पक्ष को आमतौर पर पूर्वजों के स्मरण और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का समय माना जाता है। इसी वजह से इस अवधि में कई परिवार विवाह, सगाई और अन्य बड़े मांगलिक आयोजनों को टालना पसंद करते हैं।

श्राद्ध पक्ष में विवाह, सगाई, मुंडन या नए व्यापार की शुरुआत जैसे शुभ कार्यों से बचने की परंपरा कई हिंदू परिवारों में देखने को मिलती है।

इसका आधार धार्मिक मान्यता है कि पितृ पक्ष का समय उत्सव या मांगलिक आयोजन की बजाय पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता और श्राद्ध कर्म पर केंद्रित होना चाहिए।

हालांकि, किसी विशेष संस्कार या परिस्थिति में क्या करना उचित है, यह परिवार की परंपरा और संबंधित पंचांग पर निर्भर कर सकता है।

इसलिए यदि परिवार में कोई महत्वपूर्ण कार्यक्रम निर्धारित है, तो केवल सामान्य मान्यता के आधार पर निर्णय लेने के बजाय किसी योग्य पंडित या स्थानीय पंचांग से तिथि और मुहूर्त की जानकारी लेना बेहतर है।

2. पितृ पक्ष में नई चीजें खरीदने को लेकर रखें सावधानी

पितृ पक्ष में नई चीजें खरीदना चाहिए या नहीं, यह भी लोगों के बीच अक्सर पूछा जाने वाला सवाल है।

कई पारंपरिक मान्यताओं में इस अवधि को भौतिक उत्सव और नए शुभ आरंभों की बजाय पितरों के स्मरण और धार्मिक कर्मों के लिए समर्पित माना जाता है। इसी कारण कुछ परिवार इस दौरान नए कपड़े, आभूषण या अन्य गैर-जरूरी वस्तुओं की खरीदारी से बचते हैं।

लेकिन इसे हर परिस्थिति में पूर्ण प्रतिबंध समझना सही नहीं होगा। रोजमर्रा की जरूरत की चीजें खरीदना और किसी बड़े शुभ अवसर के लिए खरीदारी करना अलग-अलग परिस्थितियां हैं।

इसलिए श्राद्ध पक्ष में वर्जित काम समझते समय अपनी पारिवारिक परंपरा और धार्मिक मान्यता को ध्यान में रखना चाहिए।

पितृ पक्ष का मुख्य उद्देश्य दिखावे या खरीदारी से अधिक अपने पूर्वजों को याद करना और उनके प्रति सम्मान व्यक्त करना है।

3. घर के दरवाजे से किसी जरूरतमंद या जीव को भूखा न लौटाएं

पितृ पक्ष में केवल श्राद्ध कर्म ही महत्वपूर्ण नहीं माना जाता, बल्कि दान, अन्न और जल देने की परंपरा का भी विशेष स्थान है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार यदि इस अवधि में कोई जरूरतमंद व्यक्ति आपके दरवाजे पर आता है तो उसे यथासंभव भोजन या पानी देना चाहिए। इसी तरह कौवे, गाय, कुत्ते और अन्य जीवों को भोजन कराने की परंपरा भी कई परिवारों में पितृ कर्म से जुड़ी हुई है।

विशेष रूप से श्राद्ध के दौरान कौवे को भोजन कराने की परंपरा काफी प्रचलित है। धार्मिक मान्यता में कौवे को पितरों से जुड़े प्रतीक के रूप में देखा जाता है।

इसका अर्थ यह नहीं है कि हर आने वाले जीव को किसी विशेष धार्मिक कारण से भोजन कराना अनिवार्य है। बल्कि इसके पीछे दान, सेवा, जीवों के प्रति करुणा और पूर्वजों के प्रति श्रद्धा की भावना को महत्वपूर्ण माना जाता है।

इसलिए यदि संभव हो तो इस अवधि में जरूरतमंदों को भोजन कराना, पानी पिलाना और पशु-पक्षियों के लिए अन्न-पानी की व्यवस्था करना एक सकारात्मक परंपरा के रूप में अपनाया जा सकता है।

4. पितृ पक्ष में बाल, दाढ़ी और नाखून काटने को लेकर क्या मान्यता है?

पितृ पक्ष में बाल और नाखून काटना चाहिए या नहीं, यह सबसे ज्यादा पूछे जाने वाले सवालों में शामिल है।

कई हिंदू परिवारों में श्राद्ध पक्ष के दौरान बाल, दाढ़ी और नाखून काटने से बचने की परंपरा है। इसका संबंध इस अवधि में रखे जाने वाले संयम और धार्मिक अनुशासन से जोड़ा जाता है।

कुछ परंपराओं में श्राद्ध करने वाले व्यक्ति के लिए विशेष आचार-विचार बताए जाते हैं, जिनमें सादगी और संयम को महत्व दिया जाता है।

हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। सभी परिवारों और सभी क्षेत्रों में इन नियमों का पालन बिल्कुल एक जैसा नहीं होता। इसलिए इसे सार्वभौमिक नियम की तरह प्रस्तुत करने के बजाय पारंपरिक मान्यता के रूप में समझना अधिक उचित है।

यदि आप स्वयं श्राद्ध कर्म कर रहे हैं, तो अपने परिवार की परंपरा और पंडित द्वारा बताए गए नियमों का पालन करें।

5. घर के बड़े-बुजुर्गों का अपमान बिल्कुल न करें

पितृ पक्ष का सबसे महत्वपूर्ण संदेश केवल कर्मकांड तक सीमित नहीं है। यह परिवार और पूर्वजों के प्रति सम्मान की भावना से भी जुड़ा हुआ है।

इसीलिए इस दौरान घर के बड़े-बुजुर्गों का अपमान, उनसे दुर्व्यवहार या अनावश्यक विवाद से बचने की सलाह दी जाती है।

पूर्वजों का सम्मान करने की परंपरा का वास्तविक भाव तभी दिखाई देता है जब परिवार में जीवित बुजुर्गों के प्रति भी सम्मान और संवेदनशीलता रखी जाए।

धार्मिक मान्यताओं में बुजुर्गों के आशीर्वाद को परिवार की सुख-शांति और समृद्धि से जोड़ा गया है। इसलिए पितृ पक्ष में ही नहीं, बल्कि पूरे वर्ष माता-पिता और परिवार के वरिष्ठ सदस्यों के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार करना महत्वपूर्ण माना जाता है।

क्रोध, अपशब्द और विवाद से बचकर घर का वातावरण शांत रखना इस अवधि की भावना के अधिक अनुरूप है।

पितृ पक्ष में क्या करें?

अगर आप सोच रहे हैं कि पितृ पक्ष में क्या करें और क्या न करें, तो कुछ सामान्य पारंपरिक बातों का ध्यान रखा जा सकता है।

  • पूर्वजों का श्रद्धापूर्वक स्मरण करें।
  • अपनी परंपरा के अनुसार श्राद्ध और तर्पण करें।
  • जरूरतमंदों को भोजन या दान दें।
  • पशु-पक्षियों के लिए अन्न और पानी रखें।
  • घर के बुजुर्गों का सम्मान करें।
  • अनावश्यक विवाद और क्रोध से बचें।
  • भोजन और दैनिक जीवन में संयम रखें।
  • श्राद्ध की तिथि के लिए स्थानीय पंचांग की जानकारी लें।

श्राद्ध कर्म के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात सही तिथि है। परंपरा में सामान्य कैलेंडर तारीख के बजाय उस तिथि को महत्व दिया जाता है जिस तिथि को पूर्वज का निधन हुआ था। इसलिए व्यक्तिगत श्राद्ध की सही तिथि जानने के लिए पंचांग या परिवार की परंपरा देखना जरूरी है।

क्या पितृ पक्ष में इन नियमों का पालन सभी के लिए समान है?

पितृ पक्ष से जुड़े कई नियम धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं। अलग-अलग क्षेत्रों, परिवारों और संप्रदायों में इनके पालन का तरीका अलग हो सकता है।

उदाहरण के लिए, बाल या नाखून काटने, नई वस्तु खरीदने या किसी विशेष भोजन से परहेज करने के नियम हर परिवार में समान नहीं होते।

इसी तरह पितृ दोष से जुड़ी मान्यताओं को भी धार्मिक और ज्योतिषीय संदर्भ में ही समझना चाहिए। इन्हें वैज्ञानिक रूप से सिद्ध कारण-परिणाम के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।

इसलिए पितृ पक्ष में सबसे जरूरी बात डर पैदा करना नहीं, बल्कि श्रद्धा, संयम, सेवा और पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता की भावना रखना है।

निष्कर्ष

पितृ पक्ष को हिंदू परंपरा में पूर्वजों को याद करने और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का विशेष अवसर माना जाता है। इस दौरान कई परिवार मांगलिक कार्यों से दूरी रखते हैं, खरीदारी में संयम बरतते हैं, बाल-दाढ़ी और नाखून काटने से बचते हैं तथा दान-पुण्य और जीव सेवा को महत्व देते हैं।

लेकिन इन सभी नियमों को अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय पंचांग के संदर्भ में समझना चाहिए।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पितृ पक्ष केवल कुछ चीजें “न करने” का समय नहीं है। यह अपने पूर्वजों को याद करने, परिवार के बुजुर्गों का सम्मान करने, जरूरतमंदों की सहायता करने और अपने व्यवहार में संयम लाने का अवसर भी है।

ॐ पितृ देवतायै नमः।

Total Mala Count (माला गिनती) : 0
🗨️
Chatbot
Hello! How can I help you today?
📘 Must Read
Articles for you
Karva Chauth 2022 Puja Time | Karva Chauth Vrat Puja Samagri
👁️ 7,019

karwa chauth pujan and thali

·

जानिए करवा चौथ(karwa chauth) व्रत पूजा विधि, पूजा थाली सामग्री एवं चाँद निकलने का समय

Vaishno Devi Temple || माँ वैष्णो देवी || माँ वैष्णो देवी ने भैरवनाथ का वध क्यों किया था
👁️ 5,115

Vaishno Devi

·

वैष्णो देवी यात्रा के मुख्य पड़ाव व अन्य दर्शनीय स्थान,माँ वैष्णो देवी ने भैरवनाथ का वध क्यों किया था?,भारत के जम्मू कश्मीर राज्य कीराज्य की हसीन वादियों में उधमपुर....

51 शक्तिपीठों की सूची | 18, 52 व 108 Shakti Peeth List in Hindi – स्थान सहित
👁️ 6,832

51 shakti peethas list

·

भारत के 51 शक्तिपीठों की सम्पूर्ण सूची नाम और स्थान सहित। जानें 18, 52 व 108 शक्तिपीठ के नाम, स्थान और धार्मिक महत्व हिंदी में।

श्री राम चालीसा के लाभ - jai shree ram | Shri Ram chalisa Benefits in hindi
👁️ 5,251

shri ram chalisa ke labh

·

shri ram chalisa path ke fayede,राम चालीसा का पाठ नित्य प्रतिदिन करना बहुत लाभ दायक होता जानिए श्री राम चालीसा पढ़ने से कैसे बढ़ता है मान सम्मान..

cow worship on bach baras
👁️ 9,848

cow worship on bach baras

·

बछ बारस का पर्व एवं महत्व,एक माँ अपने पुत्र के उज्ज्वल भविष्य की उन्नति एवँ लंबी स्वस्थ आयु की कामना के लिए इस व्रत को करती है

how to worship maa shailputri on navratri day 1 puja vidhi and beej mantra
👁️ 9,189

how to worship maa shailputri on navratri day 1 puja vidhi and beej mantra

·

माँ शैलपुत्री पूजन विधि, बीज मंत्र ,पाठ,कवच एवं भोग: पहले दिन माँ दुर्गा के पहले स्वरूप शैलपुत्री की पूजा होती है। पर्वतराज हिमालय के यहाँ पुत्री रूप में

how to worship maa siddhidatri on navratri day 9 puja vidhi and beej mantra
👁️ 9,783

how to worship maa siddhidatri on navratri day 9 puja vidhi and beej mantra

·

दुर्गा की नवम शक्ति का नाम सिद्धि है। ये सिद्धिदात्री हैं। सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली माता इन्हीं को माना गया है। मार्कण्डेय पुराण के अनुसार अणिमा, महिमा.....

Kartik Purnima | कार्तिक पूर्णिमा पूजन विधि एवँ महत्व
👁️ 9,440

kartik purnima pujan vidhi and muhurta

·

कार्तिक पूर्णिमा पूजन विधि एवँ महत्व:हिंदू वर्ष कैलेंडर के अनुसार प्रत्येक मास में एक पूर्णिमा तिथि आती है। इस वर्ष कार्तिक पूर्णिमा की तिथि और शुभ मुहूर्त नवम्बर 30 2020 सोमवार...

how to worship maa Brahmacharini on navratri day 2 puja vidhi and beej mantra
👁️ 7,563

how to worship maa Brahmacharini on navratri day 2 puja vidhi and beej mantra

·

माँ ब्रह्मचारिणी पूजन,बीज मंत्र,पाठ,कवच एवं भोग: माँ दुर्गा की नवशक्तियों का दूसरा स्वरूप ब्रह्मचारिणी का है। यहाँ ब्रह्म शब्द का अर्थ तपस्या है..

Ganesh Chaturthi Chandra Dosh and its remedies
👁️ 9,909

Ganesh Chaturthi Chandra Dosh and its remedies

·

क्यों नही देखते गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा, यदि भूल से गणेश चतुर्थी के दिन चन्द्रमा के दर्शन हो जाएं तो मिथ्या दोष से बचाव के लिए निम्नलिखित मंत्र का जाप करना चाहिए तथा दी गई कथा का श्रवण करना...

Hanuman ji ki Ashta Siddhi || Hanuman navnidhi
👁️ 6,802

ashta siddhi navnidhi

·

हनुमान जी की आठ सिद्धियां एवं नव निधियां अपने भक्तो को आठ प्रकार की सिद्धयाँ तथा नौ प्रकार की निधियाँ प्रदान कर सकते हैं ऐसा सीतामाता ने उन्हे वरदान दिया....

Sharad Purnima - शरद पूर्णिमा की मान्यता,पूजन विधि
👁️ 7,172

sharad purnima

·

शरद पूर्णिमा:शरद ऋतु में आने वाली पूर्णिमा का काफी महत्व माना गया है। मान्यता के अनुसार माना जाता है कि शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा संपूर्ण...

Tulsi Vivah - तुलसी विवाह शुभ मुहूर्त एवँ महत्व व कथा
👁️ 7,267

tulsi vivah

·

Tulsi Vivah: हिंदू धर्म में तुलसी विवाह का बेहद महत्व बताया गया है। कहा जाता है यह वही दिन है जिस दिन भगवान विष्णु और सभी देवता....

Rudraksh पहनने के 6 लाभ | जानिए रुद्राक्ष पहनने से कैसे होते है रोग दूर
👁️ 8,305

Rudraksh ke labh

·

जानिए रुद्राक्ष पहनने से कैसे होते है रोग दूर रुद्राक्ष पहनने से विवाह की बाधा होगी दूर और घर में बानी रहेगी शांति..

Siddha Kunjika Stotram benefits | kunjika stotram meaning in hindi
👁️ 6,198

advantages and meaning of siddha kunjika stotram

·

सिद्ध कुंजिका स्त्रोत का अर्थ एवं कुंजिका स्तोत्र के लाभ, यह रुद्रयामल के अंतर्गत गौरी तंत्र में भगवान शिव और माता पार्वती के संवाद के द्वारा उत्पन्न हुआ है..

Beej Mantras Of All Planets | समस्त ग्रहों के बीज मंत्र
👁️ 5,742

Beej Mantras Of All Planets

·

सभी ग्रहों के बीज मंत्र एवं गृह शांति के उपाय,बीज मंत्र द्वारा ग्रह शांति, ज्यादा जानकारी के लिए पढ़े...

🌟 Join JaiBhole Community on WhatsApp

Get daily राशिफल, ज्योतिष टिप्स, मानसिक शांति मंत्र, और आध्यात्मिक अपडेट्स — सीधे आपके मोबाइल पर!

🟢 Join Now 📲 Stay connected with 1000+ spiritual seekers

🔎 Explore More

Want to read more powerful mantras and remedies?

📚 Visit Reading Section